Misc

दर्श अमावस्या स्पेशल – जानिए इस दिन दीपदान करने के 3 चमत्कारी लाभ

MiscHindu Gyan (हिन्दू ज्ञान)हिन्दी
Share This

Join HinduNidhi WhatsApp Channel

Stay updated with the latest Hindu Text, updates, and exclusive content. Join our WhatsApp channel now!

Join Now

हिंदू धर्म और वैदिक पंचांग में अमावस्या की तिथि का विशेष महत्व है, लेकिन जब बात ‘दर्श अमावस्या’ की आती है, तो इसका आध्यात्मिक वजन और भी बढ़ जाता है। अमावस्या की वह रात जब चंद्रमा पूरी तरह अदृश्य होता है, उसे ‘दर्श’ कहा जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन न केवल पितरों को प्रसन्न करने के लिए उत्तम है, बल्कि जीवन के अंधकार को मिटाने के लिए ‘दीपदान’ करने का भी सबसे बड़ा अवसर है। आइए जानते हैं दर्श अमावस्या पर दीपदान करने के वे 3 चमत्कारी लाभ जो आपके जीवन की दिशा बदल सकते हैं।

क्या है दर्श अमावस्या का महत्व?

शास्त्रों के अनुसार, दर्श अमावस्या के दिन चंद्रमा अपनी सोलहवीं कला (जिसे ‘अमा’ कहा जाता है) में निवास करते हैं। इस दिन पूर्वजों (पितरों) की आत्माएं पृथ्वी के निकट होती हैं। चूंकि इस रात पूर्ण अंधकार होता है, इसलिए प्रकाश का दान यानी दीपदान करना प्रतीकात्मक रूप से अज्ञानता और नकारात्मकता के विनाश का प्रतीक माना जाता है।

दीपदान के 3 चमत्कारी लाभ

  1. पितृ दोष से मुक्ति और पूर्वजों का आशीर्वाद – दर्श अमावस्या मुख्य रूप से पितरों को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि इस रात किया गया दीपदान पितरों के मार्ग को आलोकित करता है। यदि आपकी कुंडली में पितृ दोष है या कार्यों में बार-बार बाधा आ रही है, तो दक्षिण दिशा की ओर मुख करके दीपक जलाने से पितृ तृप्त होते हैं। उनकी प्रसन्नता से घर में सुख-शांति और वंश वृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
  2. आर्थिक तंगी का नाश और लक्ष्मी कृपा – अमावस्या की रात्रि मां लक्ष्मी के आगमन की रात्रि भी मानी जाती है। दीपदान को ‘पॉजिटिव एनर्जी’ को आमंत्रित करने का जरिया माना गया है। इस दिन पीपल के वृक्ष के नीचे या तुलसी के पास शुद्ध घी का दीपक जलाने से घर की दरिद्रता दूर होती है। यह प्रयोग आपके रुके हुए धन प्राप्ति के मार्ग खोलता है और व्यापार में उन्नति लाता है।
  3. मानसिक शांति और नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा – वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टिकोण से, अमावस्या के समय व्यक्ति का मन थोड़ा विचलित रह सकता है। दीपदान मन के भय को समाप्त करता है। घर के मुख्य द्वार पर सरसों के तेल का दीपक जलाने से बुरी शक्तियां और नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं कर पातीं। इससे परिवार के सदस्यों का मानसिक तनाव कम होता है और वातावरण में सकारात्मकता का संचार होता है।

दीपदान कैसे करें? (सही विधि)

अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए दीपदान के इन नियमों का पालन करें:

  • नदी के तट पर, मंदिर में, पीपल के नीचे या अपने घर के मुख्य द्वार पर दीपदान करें।
  • मिट्टी का दीपक सबसे उत्तम माना जाता है। इसमें शुद्ध घी या तिल के तेल का प्रयोग करें।
  • पितरों के लिए दीपक जला रहे हैं तो उसकी लौ दक्षिण दिशा की ओर होनी चाहिए। देवताओं के लिए उत्तर या पूर्व दिशा शुभ है।

Found a Mistake or Error? Report it Now

Join WhatsApp Channel Download App