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ललिता जयंती 2026 – मां ललिता त्रिपुर सुंदरी की कृपा पाने के लिए सरल पूजा विधि और शुभ मुहूर्त।

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क्या आप अपने जीवन में सुख, समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना करते हैं? 2026 में ललिता जयंती का पावन अवसर आ रहा है। यह दिन दस महाविद्याओं में से एक, माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी (राजराजेश्वरी) को समर्पित है। आइये जानते हैं इस वर्ष ललिता जयंती कब है, इसका महत्व क्या है और माँ को प्रसन्न करने की सबसे सरल विधि।

ललिता जयंती 2026 – तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, ललिता जयंती माघ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह संयोग अत्यंत शुभ दिन पर बन रहा है।

  • दिनांक – 1 फरवरी 2026
  • दिन – रविवार (Sunday)
  • तिथि – माघ पूर्णिमा (Magha Purnima)

शुभ मुहूर्त विवरण (दिल्ली समयानुसार)

  • पूर्णिमा तिथि प्रारंभ – 1 फरवरी 2026 को सुबह 05:52 बजे से
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त – 2 फरवरी 2026 को तड़के 03:38 बजे तक
  • पूजा का श्रेष्ठ समय – चूँकि माँ ललिता एक महाविद्या हैं, इनकी पूजा सूर्योदय के समय और मध्य रात्रि (निशिता काल) दोनों में फलदायी मानी जाती है।
  • प्रातः काल पूजा – सुबह 07:00 से 11:00 बजे के बीच।
  • निशिता काल (गुप्त साधना के लिए) – रात्रि 11:30 से 12:45 बजे तक।

कौन हैं माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी?

माँ ललिता, जिन्हें ‘षोडशी’ और ‘त्रिपुर सुंदरी’ के नाम से भी जाना जाता है, दस महाविद्याओं में तीसरे स्थान पर विराजमान हैं। ‘त्रिपुर’ का अर्थ है तीनों लोकों (स्वर्ग, पृथ्वी, पाताल) में सबसे सुंदर। इनका स्वरूप 16 वर्ष की किशोर अवस्था का है, जो यह दर्शाता है कि माँ सदैव यौवन और ऊर्जा से परिपूर्ण हैं।

कहा जाता है कि ललिता देवी की उपासना से साधक को न केवल भौतिक सुख (धन, यश, सौंदर्य) मिलता है, बल्कि अंत में मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। यह श्री विद्या (Sri Vidya) की अधिष्ठात्री देवी हैं।

ललिता जयंती 2026 – पूजा सामग्री सूची

पूजा शुरू करने से पहले निम्नलिखित सामग्री एकत्रित कर लें:

  • प्रतिमा/यंत्र – माँ ललिता की फोटो या श्री यंत्र (Sri Yantra)।
  • वस्त्र – लाल या गुलाबी रंग का आसन और वस्त्र।
  • फूल – लाल गुड़हल (Hibiscus) या कमल का फूल (माँ को अति प्रिय)।
  • नैवेद्य (भोग) – खीर, मिश्री, शहद और दूध से बनी मिठाइयां।
  • सौभाग्य सामग्री – कुमकुम, सिन्दूर, बिंदी, चूड़ियाँ।
  • अन्य – धूप, दीप (घी का), अक्षत, गंगाजल, इत्र।

माँ ललिता की सरल पूजा विधि

गृहस्थ जनों के लिए यहाँ एक अत्यंत सरल और सात्विक पूजा विधि दी जा रही है:

  • ललिता जयंती (1 फरवरी) की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। संभव हो तो पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाएं। इस दिन लाल या गुलाबी रंग के वस्त्र धारण करना शुभ होता है।
  • पूजा घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में एक चौकी लगाएं। उस पर लाल वस्त्र बिछाएं और माँ ललिता की तस्वीर या श्री यंत्र स्थापित करें।
  • हाथ में जल लेकर व्रत और पूजा का संकल्प लें – “हे माँ त्रिपुर सुंदरी, मैं (अपना नाम) आज आपकी कृपा पाने हेतु यह पूजन कर रहा/रही हूँ, इसे स्वीकार करें।”
  • यदि श्री यंत्र है तो उसे पंचामृत से स्नान कराएं। माँ को चंदन और कुंकुम का तिलक लगाएं। माँ ललिता को कुंकुम अर्चन (कुंकुम चढ़ाना) सबसे अधिक प्रिय है।
  • माँ को लाल गुड़हल या गुलाब की माला अर्पित करें। इत्र भी अवश्य चढ़ाएं।
  • स्फटिक या रुद्राक्ष की माला से नीचे दिए गए मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
  • माँ को खीर या मावे की मिठाई का भोग लगाएं।
  • अंत में कपूर जलाकर श्री ललिता माता आरती करें और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें।

चमत्कारी मंत्र (Powerful Mantras)

माँ ललिता की साधना में मंत्रों का विशेष महत्व है। आप अपनी सुविधानुसार इनका जाप कर सकते हैं:

बीज मंत्र (सबसे सरल और शक्तिशाली):

|| ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः || (Om Aim Hreem Shreem Tripura Sundariyai Namah)

विशेष मंत्र (सौंदर्य और सम्मोहन के लिए):

|| ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौ: ॐ ह्रीं श्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं सौ: ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं नम: ||

सुझाव – यदि आप मंत्रों का सही उच्चारण नहीं कर सकते, तो इस दिन “ललिता सहस्रनाम” (Lalita Sahasranama) का पाठ करना या सुनना सर्वोत्तम उपाय है।

इस दिन किए जाने वाले विशेष उपाय (Special Remedies)

  • वैवाहिक सुख के लिए – पति-पत्नी मिलकर माँ को इत्र और लाल पुष्प अर्पित करें। इससे दांपत्य जीवन में मधुरता आती है।
  • धन प्राप्ति के लिए – श्री यंत्र के सामने घी का दीपक जलाएं और ‘श्री सूक्त’ का पाठ करें।
  • मनोकामना पूर्ति के लिए – भोजपत्र पर लाल चंदन से अपनी मनोकामना लिखें और उसे माँ के चरणों में अर्पित कर दें।

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