भगवान दत्तात्रेय को समर्पित चित्तस्थिरीकर दत्त स्तोत्रम् (Chitta Sthirikara Datta Stotram PDF) एक अत्यंत प्रभावशाली और शांतदायक स्तोत्र है। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, ‘चित्त-स्थिरीकर’ का अर्थ है मन को स्थिर करने वाला। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जब मानसिक तनाव और अशांति बढ़ जाती है, तब इस स्तोत्र का पाठ मन को असीम शांति प्रदान करता है और एकाग्रता बढ़ाता है।
यह स्तोत्र भक्त के हृदय से भय, चिंता और व्याकुलता को दूर कर उसे आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर करता है। यदि आप अपनी मानसिक शक्ति को मजबूत करना चाहते हैं और श्री गुरुदेव दत्त की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो इसका नित्य पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है। शुद्ध और सटीक पाठ के लिए आप Chitta Sthirikara Datta Stotram PDF हमारी वेबसाइट से डाउनलोड करें और अपनी दैनिक पूजा में इसे सम्मिलित करें।
|| श्री दत्त स्तोत्रम् (चित्तस्थिरीकर) (Chitta Sthirikara Datta Stotram PDF) ||
अनसूयात्रिसम्भूत दत्तात्रेय महामते ।
सर्वदेवाधिदेव त्वं मम चित्तं स्थिरीकुरु ॥ १ ॥
शरणागतदीनार्ततारकाखिलकारक ।
सर्वपालक देव त्वं मम चित्तं स्थिरीकुरु ॥ २ ॥
सर्वमङ्गलमाङ्गल्य सर्वाधिव्याधिभेषज ।
सर्वसङ्कटहारिंस्त्वं मम चित्तं स्थिरीकुरु ॥ ३ ॥
स्मर्तृगामी स्वभक्तानां कामदो रिपुनाशनः ।
भुक्तिमुक्तिप्रदः स त्वं मम चित्तं स्थिरीकुरु ॥ ४ ॥
सर्वपापक्षयकरस्तापदैन्यनिवारणः ।
योऽभीष्टदः प्रभुः स त्वं मम चित्तं स्थिरीकुरु ॥ ५ ॥
य एतत्प्रयतः श्लोकपञ्चकं प्रपठेत्सुधीः ।
स्थिरचित्तः स भगवत् कृपापात्रं भविष्यति ॥ ६ ॥
इति श्रीपरमहंस परिव्राजकाचार्य श्रीमद्वासुदेवानन्दसरस्वती स्वामी कृतं श्री दत्त स्तोत्रम् ॥
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