धनु संक्रान्ति 2026 का पर्व 16 दिसंबर 2026, बुधवार को मनाया जाएगा। यह दिन तब आता है जब सूर्य वृश्चिक राशि से निकलकर धनु राशि में प्रवेश करते हैं। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इस दिन से ‘खरमास’ (या मलमास) की शुरुआत होती है, जिसमें विवाह और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है।
सनातन धर्म में सूर्य के राशि परिवर्तन (Sun Transit) को संक्रान्ति के रूप में मनाया जाता है, और जब सूर्यदेव गुरु की राशि धनु में प्रवेश करते हैं, तो यह धनु संक्रान्ति कहलाती है। यह न केवल एक खगोलीय घटना (Astronomical Event) है, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी इसका बहुत अधिक महत्व है। इसी दिन से ‘खरमास’ या ‘मलमास’ (Malmas) की शुरुआत होती है, जिसमें एक महीने के लिए सभी शुभ और मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है।
आइए, 2026 में धनु संक्रान्ति की तिथि, सूर्य पूजा की सटीक विधि और खरमास के दौरान हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं, इस पर विस्तार से जानते हैं।
धनु संक्रान्ति 2026 – तिथि और शुभ मुहूर्त (Auspicious Time)
2026 में धनु संक्रान्ति 16 दिसंबर 2026, बुधवार को मनाई जाएगी।
- धनु संक्रान्ति का क्षण (Sankranti Moment) – सुबह 10:39 बजे
- पुण्य काल मुहूर्त (Punya Kaal Muhurta) – 10:29 ए एम से 04:00 PM (अवधि – 05 घण्टे 31 मिनट्स)
- महा पुण्य काल मुहूर्त (Maha Punya Kaal Muhurta) – 10:29 ए एम से 12:13 PM (अवधि – 01 घण्टा 43 मिनट्स)
- विशेष – संक्रान्ति काल में स्नान, दान और सूर्य पूजा का विशेष महत्व है, खासकर ‘महा पुण्य काल’ में किए गए कार्य सर्वाधिक फलदायी होते हैं।
धनु संक्रान्ति का आध्यात्मिक महत्व (Spiritual Significance)
सूर्य जब धनु राशि (Sagittarius Sign) में आते हैं, तो यह गुरु (बृहस्पति) का घर होता है। इस एक महीने की अवधि को खरमास कहा जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सूर्य को सभी ग्रहों का राजा माना जाता है, और जब वह गुरु के घर में होते हैं, तो उनका तेज कुछ कम हो जाता है, जिसके कारण मांगलिक कार्यों के लिए यह समय शुभ नहीं माना जाता।
हालांकि, यह महीना आध्यात्मिक कार्यों (Spiritual Practices), दान-पुण्य और उपासना के लिए अत्यंत उत्तम होता है। इस दौरान किए गए जप, तप, ध्यान और तीर्थ यात्रा से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
सूर्य पूजा की सही और सरल विधि (Right Method of Surya Puja)
धनु संक्रान्ति के दिन सूर्य देव की उपासना से आरोग्य, समृद्धि और तेज की प्राप्ति होती है।
- सूर्योदय से पहले उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त हो जाएं।
- किसी पवित्र नदी (Holy River) में स्नान करें। यदि यह संभव न हो, तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- स्वच्छ वस्त्र धारण करके सूर्य देव के समक्ष हाथ जोड़कर आज के दिन की पूजा, दान और व्रत का संकल्प (Pledge) लें।
- तांबे के लोटे में शुद्ध जल लें। उसमें लाल चंदन, लाल फूल और अक्षत (चावल) मिलाएं।
- उगते हुए सूर्य (Rising Sun) को देखते हुए “ॐ घृणि सूर्याय नमः” या “ॐ आदित्याय नमः” मंत्र का जाप करते हुए धीरे-धीरे जल की धारा अर्पित करें। ध्यान रखें कि जल आपके पैरों को न छुए, इसलिए किसी पात्र या गमले में जल अर्पित करें।
- सूर्य देव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उन्हें लाल वस्त्र, लाल पुष्प, रोली, अक्षत और गुड़ का भोग (Prasad) लगाएं।
- आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना इस दिन विशेष रूप से कल्याणकारी माना जाता है।
- अपनी क्षमतानुसार सूर्य मंत्रों (Surya Mantras) का कम से कम 108 बार जाप करें।
- पूजा के बाद गरीबों और जरूरतमंदों को अपनी श्रद्धा अनुसार तिल, गुड़, कंबल, वस्त्र और अन्न का दान करें।
- ब्राह्मणों और गाय को भोजन कराने का भी इस दिन बहुत महत्व है।
खरमास (Kharmas) में क्या करें और क्या न करें – पूरी जानकारी (Do’s and Don’ts)
धनु संक्रान्ति से मकर संक्रान्ति तक का एक महीने का समय खरमास कहलाता है। इस दौरान कुछ कार्यों को वर्जित (Forbidden) माना गया है, जबकि कुछ कार्य अत्यंत शुभ फल देते हैं।
खरमास में क्या करें (Kharmas Do’s) – पुण्यकारी कार्य
- ईश्वर उपासना भगवान विष्णु (Lord Vishnu), सूर्य देव और गुरु बृहस्पति की विशेष पूजा-अर्चना करें।
- जप, तप और ध्यान यह अवधि तपस्या (Penance), योग और आत्म-मंथन (Self-Introspection) के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
- तीर्थ यात्रा पवित्र नदियों में स्नान करना, विशेषकर गंगा, यमुना, गोदावरी जैसी नदियों में, और धार्मिक स्थलों की यात्रा करना शुभ होता है।
- दान-पुण्य गरीबों को अन्न, वस्त्र, धन, तिल और गुड़ का दान करने से कई जन्मों के पाप कटते हैं।
- पवित्र ग्रन्थों का पाठ श्रीमद्भागवत, रामचरितमानस और सत्यनारायण कथा का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है।
- ब्राह्मण सेवा ब्राह्मणों, गुरुओं और गायों की सेवा और उन्हें भोजन कराना शुभ माना जाता है।
खरमास में क्या न करें (Kharmas Don’ts) – वर्जित कार्य
- विवाह (Marriage) माना जाता है कि इस दौरान विवाह करने से वैवाहिक सुख (Marital Bliss) की प्राप्ति नहीं होती और रिश्ते में खटास आ सकती है।
- गृह प्रवेश नए घर में प्रवेश (House Warming Ceremony) करना अशुभ माना जाता है, क्योंकि इससे सुख-शांति भंग हो सकती है।
- नए व्यवसाय की शुरुआत नया व्यापार, दुकान या किसी बड़े प्रोजेक्ट (Project) की शुरुआत करना। माना जाता है कि सफलता प्राप्त नहीं होती।
- मुंडन और जनेऊ संस्कार बच्चों के ये महत्वपूर्ण संस्कार खरमास में नहीं किए जाते।
- बड़े निवेश और खरीदारी नया वाहन, जमीन-जायदाद (Property) या कीमती वस्तुएं (Expensive Items) खरीदने से बचें।
तामसिक भोजन इस दौरान तामसिक भोजन, मदिरा आदि के सेवन से दूर रहना चाहिए।
Found a Mistake or Error? Report it Now

