सनातन धर्म और हिन्दू शास्त्रों में शंख को केवल एक वाद्य यंत्र या सजावट की वस्तु नहीं, बल्कि सौभाग्य, पवित्रता और विजय का प्रतीक माना गया है। इसकी उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान निकले 14 रत्नों में से एक के रूप में हुई थी। चूँकि माता लक्ष्मी भी समुद्र से प्रकट हुई थीं, इसलिए शंख को उनका सहोदर (भाई) माना जाता है और भगवान विष्णु इसे सदैव अपने हाथों में धारण करते हैं।
शंख की स्थापना और रखने के अनिवार्य नियम
घर में शंख रखना अत्यंत शुभ है, परंतु इसके नियमों की अनदेखी करने से इसका सकारात्मक प्रभाव कम हो सकता है या विपरीत परिणाम मिल सकते हैं।
- सही दिशा और स्थान – शंख को सदैव मंदिर के भीतर भगवान श्रीहरि विष्णु की प्रतिमा के दाईं ओर स्थापित करना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इसे उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या उत्तर दिशा में रखना सर्वोत्तम होता है, क्योंकि ये दिशाएं देवताओं का स्थान मानी जाती हैं।
- पवित्रता का आधार – शंख को सीधे जमीन पर रखने की गलती कभी न करें। इसे स्थापित करने से पहले स्थान पर गंगाजल छिड़कें और इसे लाल रंग के रेशमी कपड़े, तांबे अथवा पीतल की चौकी/प्लेट पर आदरपूर्वक रखें।
- संख्या का बंधन – एक ही पूजा घर में कभी भी दो शंख एक साथ नहीं रखने चाहिए। यदि आपके पास एक से अधिक शंख हैं, तो उन्हें अलग-अलग कमरों या दूरी पर रखें।
- मुख की स्थिति – मंदिर में स्थापित करते समय ध्यान रहे कि शंख का खुला हुआ भाग हमेशा ऊपर की ओर रहे।
- सफाई और शुद्धिकरण – प्रतिदिन पूजा के बाद शंख को स्वच्छ जल से धोना चाहिए और फिर सूखे साफ कपड़े से पोंछकर रखना चाहिए। शंख के भीतर कभी भी गंदगी जमा नहीं होने देनी चाहिए।
- उपयोग का वर्गीकरण – जिस शंख की आप पूजा करते हैं, उसे कभी बजाना नहीं चाहिए। बजाने वाला शंख और पूजा करने वाला शंख अलग-अलग होने चाहिए। पूजा स्थल के शंख में हमेशा जल भरकर रखना शुभ होता है।
शंख बजाने के नियम और वर्जनाएं
- समय का महत्व – शंख को अकारण या किसी भी समय नहीं बजाना चाहिए। इसे दैनिक पूजा के दौरान केवल प्रातःकाल और सायंकाल (आरती के समय) बजाना चाहिए।
- शिव पूजा में वर्जना – भगवान शिव की पूजा या उनके अभिषेक में शंख का प्रयोग पूर्णतः वर्जित है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने शंखचूर्ण नामक दैत्य का वध किया था, जो शंख का ही स्वरूप था, इसलिए महादेव को शंख का जल अर्पित नहीं किया जाता।
शंख के बहुआयामी लाभ – धार्मिक, वास्तु और वैज्ञानिक
1. धार्मिक एवं आध्यात्मिक लाभ
- लक्ष्मी का वास – मान्यता है कि जिस घर में शंख की नियमित पूजा होती है, वहां दरिद्रता कभी नहीं आती और माता लक्ष्मी स्थायी वास करती हैं।
- नकारात्मक ऊर्जा का नाश – शंख की ध्वनि से निकलने वाली तरंगें वातावरण को शुद्ध करती हैं। जहाँ तक इसकी गूँज जाती है, वहाँ से बुरी शक्तियाँ और नकारात्मक विचार दूर हो जाते हैं।
- पाप मुक्ति – ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, शंख के जल को स्वयं पर छिड़कने या उसमें स्नान करने से तीर्थ यात्रा के समान पुण्य प्राप्त होता है।
2. स्वास्थ्य और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
- जीवाणुओं का अंत – वैज्ञानिकों का मानना है कि शंख की ध्वनि की आवृत्ति (Frequency) वातावरण में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और सूक्ष्म कीटाणुओं को नष्ट करने की क्षमता रखती है।
- फेफड़ों का व्यायाम – शंख बजाने के लिए गहरी सांस लेनी पड़ती है और पूरी ताकत से हवा छोड़नी पड़ती है। यह फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाता है और श्वास संबंधी रोगों (जैसे अस्थमा) में लाभकारी होता है।
- खनिजों का स्रोत – शंख के जल में कैल्शियम, फास्फोरस और गंधक जैसे महत्वपूर्ण तत्व आ जाते हैं। इस जल का सेवन करने से हड्डियां और दांत मजबूत होते हैं।
3. वास्तु शास्त्र के लाभ
- जाग्रत भूमि – वास्तु के अनुसार, शंख की ध्वनि ‘सोई हुई भूमि’ को जाग्रत करती है, जिससे घर में सुख-समृद्धि के नए मार्ग खुलते हैं।
- वास्तु दोष निवारण – यदि घर के किसी कोने में वास्तु दोष है, तो वहाँ शंख रखने या उसकी ध्वनि करने से दोष का प्रभाव समाप्त हो जाता है।
घर के लिए श्रेष्ठ शंखों के प्रकार
- दक्षिणावर्ती शंख – इसका मुख दाईं ओर खुलता है। इसे साक्षात् लक्ष्मी का रूप माना जाता है। यह धन-धान्य की वृद्धि के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
- वामावर्ती शंख – इसका मुख बाईं ओर खुलता है। यह सामान्यतः बजाने के काम आता है और नकारात्मकता दूर करने में सहायक है।
- गणेश शंख – इसकी आकृति भगवान गणेश जैसी होती है। इसे घर में रखने से बाधाएं दूर होती हैं और बौद्धिक क्षमता में वृद्धि होती है।
सावधानी – खंडित शंख का दुष्प्रभाव
शास्त्रों के अनुसार, घर में कभी भी टूटा हुआ या खंडित शंख नहीं रखना चाहिए। खंडित शंख नकारात्मक ऊर्जा का केंद्र बन सकता है और इससे परिवार में क्लेश बढ़ सकता है। यदि शंख खंडित हो जाए, तो उसे ससम्मान किसी पवित्र नदी में विसर्जित कर देना चाहिए।
विशेष टिप – यदि आप अपने घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार चाहते हैं, तो प्रतिदिन संध्या आरती के बाद पूरे घर में शंख बजाते हुए घूमें, इससे घर की ‘नजर’ उतरती है और शांति आती है।
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