पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब रक्तबीज नामक असुर ने देवताओं को प्रताड़ित करना शुरू किया, तब माँ दुर्गा ने देवी काली का रूप धारण किया। रक्तबीज को वरदान था कि उसकी रक्त की हर एक बूंद जमीन पर गिरने से एक नया असुर पैदा होगा। माँ काली ने अपने विकराल रूप और खप्पर से उसका सारा रक्त पी लिया ताकि वह दोबारा जीवित न हो सके। माँ काली का यह रूप बुराई के विनाश और शक्ति का प्रतीक है। उनके क्रोध को शांत करने के लिए स्वयं भगवान शिव को उनके चरणों के नीचे लेटना पड़ा था।
यदि आप इस पावन कथा को विस्तार से पढ़ना चाहते हैं और माँ की महिमा का गुणगान करना चाहते हैं, तो आप Maa Kali Katha PDF हमारी वेबसाइट से डाउनलोड करें। इस संग्रह में माँ काली के विभिन्न स्वरूपों और उनकी आरती का भी विवरण दिया गया है। माँ काली के चरणों में ध्यान लगाने से भक्तों के सभी भय और कष्ट दूर हो जाते हैं।
|| मां काली की कथा (Maa Kali Katha PDF) ||
हिंदू धर्म में मां काली का प्रमुख स्थान है। काली का अर्थ है ‘समय’ और ‘काल’। ऐसा माना जाता है कि इनकी उत्पत्ति पापियों के नाश के लिए हुई थी। समय और काल से कोई भी नहीं बच सकता; यह सभी को निगल जाता है।
माता पार्वती ने यह भयानक रूप पापियों के विनाश के लिए धारण किया था। मां काली पापियों के लिए विनाश हैं और अपने भक्तों के लिए प्रेम से भरी हुई हैं। जो भी प्राणी सच्चे मन से मां की भक्ति करता है, मां उसे मनवांछित फल देती हैं।
मां काली की कथा के अनुसार, एक समय दारुक नाम के पापी असुर ने ब्रह्मा जी की तपस्या करके उन्हें प्रसन्न कर लिया। ब्रह्मा जी से पाए वरदान के कारण दारुक अत्यंत बलशाली हो गया। वह देवताओं और ब्राह्मणों को परेशान करने लगा और उन पर अत्याचार करने लगा। उसने सभी धार्मिक अनुष्ठान और यज्ञ बंद करवा दिए और स्वर्ग लोक पर अधिकार कर लिया।
सभी देवता विचलित होकर ब्रह्मा जी और विष्णु जी के पास सहायता मांगने के लिए चले गए। ब्रह्मा जी ने बताया कि दारुक का नाश सिर्फ एक स्त्री के हाथ से हो सकता है।
सभी बड़े देवता भी उससे युद्ध में हार चुके थे। अंत में यह निश्चय किया गया कि दारुक का वध भगवान शिव की पत्नी माता पार्वती करेंगी। भगवान शिव ने अपना तीसरा नेत्र खोला और भयानक व प्रचंड महाकाली को जन्म दिया।
उनका शरीर काले रंग का था और मां काली के माथे पर तीसरा नेत्र और चंद्र रेखा थी। उनके हाथों में त्रिशूल और कई प्रकार के अस्त्र-शस्त्र थे। महाकाली के प्रचंड रूप को देखकर सभी देवता थर-थर कांपने लगे और भय के कारण वहां से भागने लगे।
युद्ध में दारुक महाकाली से पराजित हुआ और इस तरह उस दुष्ट का अंत हुआ। लेकिन, महाकाली के भयानक रूप से चारों तरफ अग्नि की लपटें उत्पन्न हो गईं। महाकाली के क्रोध को सिर्फ भगवान शिव ही रोक सकते थे, इसीलिए उन्होंने एक बालक का अवतार लिया।
भगवान शिव शमशान पहुंचे और वहां बालक के रूप में लेट कर रोने लगे। छोटे बालक को देखकर महाकाली का क्रोध शांत हो गया और उनके हृदय में ममता जागृत हो गई। उन्होंने शिव रूपी उस छोटे बालक को उठा लिया और अपने स्तनों से दूध पिलाने लगीं। इस प्रकार शिवजी ने उनके क्रोध को पी लिया, जिससे महाकाली का भयानक और प्रचंड क्रोध शांत हुआ। इसके बाद महाकाली मूर्छित हो गईं।
उन्हें होश में लाने के लिए भगवान शिव ने तांडव नृत्य किया। होश में आने पर वह पुनः माता पार्वती के रूप में आ चुकी थीं। माता पार्वती भगवान शिव का नृत्य देखकर स्वयं भी नृत्य करने लगीं, जिसके कारण उन्हें ‘योगिनी’ के नाम से भी पुकारा जाता है।
इसके अलावा महाकाली ने महिषासुर, चंड-मुंड, रक्तबीज, और शुंभ-निशुंभ जैसे राक्षसों का वध किया। 10 महाविद्याओं में से महाकाली प्रथम महाविद्या हैं।
|| काली माता की जय ||
Found a Mistake or Error? Report it Now
Download मां काली की कथा MP3 (FREE)
♫ मां काली की कथा MP3

