भारत अपनी समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। यहां हर मंदिर की अपनी एक अनोखी कहानी और रहस्य है। ऐसा ही एक रहस्यमयी और चमत्कारी मंदिर है, माता मनसा देवी का। यह मंदिर भारत के कई हिस्सों में स्थित है, लेकिन हरिद्वार और पंचकूला के मनसा देवी मंदिर सबसे प्रसिद्ध हैं। इन्हें ‘नागों की देवी’ क्यों कहा जाता है, इसके पीछे एक गहरा और दिलचस्प इतिहास छिपा है। आइए, इस ब्लॉग में हम माता मनसा देवी के रहस्य, चमत्कारों, और इतिहास को विस्तार से जानते हैं।
मनसा देवी – कौन हैं और कहाँ से आया यह नाम?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मनसा देवी भगवान शिव की मानस पुत्री हैं और नागराज वासुकी की बहन हैं। ‘मनसा’ शब्द का अर्थ है ‘मन से जन्मी’, यानी वह जो मन से उत्पन्न हुई हो। कुछ पौराणिक कथाओं में उन्हें कश्यप ऋषि की पुत्री और नागराज तक्षक की बहन भी माना गया है। उन्हें ‘विषहरा’ के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि उनके पास विष (जहर) को हरने की अद्भुत शक्ति है। इसी वजह से उन्हें नागों की देवी (Goddess of Snakes) कहा जाता है।
नागों की देवी क्यों कहलाती हैं माता मनसा?
मनसा देवी को नागों की देवी कहने के पीछे कई मान्यताएं हैं। सबसे प्रमुख मान्यता यह है कि उन्होंने भगवान शिव को विष के प्रभाव से बचाया था। एक कथा के अनुसार, जब भगवान शिव ने समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को पिया था, तो उनका कंठ नीला पड़ गया था। तब देवी मनसा ने अपनी शक्ति से उस विष के प्रभाव को कम किया था। इसी घटना के बाद उन्हें विषहरण और नागों पर नियंत्रण रखने वाली देवी के रूप में पूजा जाने लगा।
नागराज वासुकी और तक्षक से उनका संबंध भी उन्हें नागों की देवी के रूप में स्थापित करता है। सांपों के काटने पर लोग उनके मंदिर में आकर आशीर्वाद लेते हैं और विष के प्रभाव को खत्म करने के लिए प्रार्थना करते हैं। यह एक ऐसा विश्वास है जो सदियों से चला आ रहा है।
हरिद्वार का मनसा देवी मंदिर – चमत्कारों की भूमि
हरिद्वार का मनसा देवी मंदिर शिवालिक पहाड़ियों के ‘बिल्व पर्वत’ पर स्थित है। यह मंदिर हरिद्वार के प्रमुख ‘सिद्ध पीठों’ में से एक है। ऐसी मान्यता है कि यहां मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है। भक्त अपनी इच्छा पूरी होने पर मंदिर के पेड़ पर एक धागा बांधते हैं और जब उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है, तो वे उस धागे को खोलने वापस आते हैं। यह परंपरा (tradition) इस मंदिर की सबसे खास बात है।
यह मंदिर मां दुर्गा के 51 शक्ति पीठों में से एक भी माना जाता है। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्त या तो पैदल चढ़ाई करते हैं या रोप-वे (rope-way) का इस्तेमाल करते हैं, जिसे ‘मनसा देवी उडन खटोला’ कहा जाता है। यह यात्रा बहुत ही रोमांचक और आध्यात्मिक होती है, जिसमें गंगा नदी और हरिद्वार शहर का शानदार दृश्य देखने को मिलता है।
पंचकूला का मनसा देवी मंदिर – इतिहास और वास्तुशिल्प
पंचकूला में स्थित मनसा देवी मंदिर भी बहुत प्रसिद्ध है। इस मंदिर का निर्माण राजा गोपाल सिंह ने 1811 ई. में करवाया था। यह मंदिर ‘पिंजौर’ शहर के पास स्थित है और इसे ‘माता मनसा देवी श्राइन बोर्ड’ द्वारा प्रबंधित किया जाता है। इस मंदिर की वास्तुकला (architecture) भी बहुत प्रभावशाली है। मंदिर परिसर में कई छोटे-छोटे मंदिर हैं, जिनमें भगवान शिव और अन्य देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं।
यहां हर साल चैत्र और आश्विन के नवरात्रि के दौरान भव्य मेले का आयोजन होता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन करने आते हैं। इस दौरान मंदिर को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है और यहां का माहौल पूरी तरह से भक्तिमय हो जाता है।
अनोखी मान्यताएँ और चमत्कार
- साँपों से बचाव – मनसा देवी को सांपों से सुरक्षा प्रदान करने वाली देवी माना जाता है। खासकर ग्रामीण इलाकों में, जहां सांपों का खतरा ज्यादा होता है, लोग सांप के काटने पर सबसे पहले मनसा देवी का नाम लेते हैं।
- मनोकामना पूर्ति – मंदिर में पेड़ पर धागा बांधने की परंपरा भक्तों के अटूट विश्वास का प्रतीक है। यह माना जाता है कि मनसा देवी भक्तों की हर सच्ची इच्छा को पूरा करती हैं।
- नपुंसकता और निसंतानता से मुक्ति – कई लोग संतान प्राप्ति के लिए मनसा देवी की पूजा करते हैं। ऐसी मान्यता है कि उनकी कृपा से निसंतान दंपत्तियों को संतान का सुख प्राप्त होता है।
- रोगों से मुक्ति – विषहर शक्ति के कारण, उन्हें कई गंभीर रोगों से मुक्ति दिलाने वाली देवी भी माना जाता है। भक्त यहां आकर स्वास्थ्य और दीर्घायु का वरदान मांगते हैं।
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